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थाने में आवेदन लिखने में असमर्थ व्यक्ति के लिए क्या पुलिस आवेदन लिख सकती है?

थाने में आवेदन लिखने में असमर्थ व्यक्ति के लिए क्या पुलिस आवेदन लिख सकती है?

क्या आपने कभी सोचा है कि यदि कोई व्यक्ति पढ़ा-लिखा नहीं है, बुजुर्ग है, दिव्यांग है या किसी अन्य कारण से अपनी शिकायत लिखने में असमर्थ है, तो क्या उसे केवल इसलिए थाने से वापस किया जा सकता है कि “पहले आवेदन लिखकर लाइए”?

इस संबंध में कानून महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।

⚖️ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में क्या प्रावधान है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के अनुसार संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को मौखिक रूप से भी दी जा सकती है। यदि सूचना मौखिक रूप से दी जाती है, तो उसे पुलिस अधिकारी द्वारा या उसके निर्देशन में लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए और सूचना देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाया जाना चाहिए। इसके बाद सूचना देने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर लिए जाते हैं।

इसका सीधा अर्थ यह है कि संज्ञेय अपराध की सूचना देने के लिए हर व्यक्ति का स्वयं लिखित आवेदन लेकर आना अनिवार्य नहीं है।

📝 उदाहरण से समझिए

मान लीजिए कोई बुजुर्ग व्यक्ति थाने पहुंचता है और कहता है—

“मेरे साथ मारपीट हुई है और मुझे धमकी दी गई है, लेकिन मैं आवेदन लिख नहीं सकता।”

ऐसी स्थिति में यदि वह मौखिक रूप से घटना की जानकारी देता है, तो संज्ञेय अपराध होने की स्थिति में पुलिस उस सूचना को कानून के अनुसार लिखित रूप में दर्ज कर सकती/करनी चाहिए और उसे शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाना चाहिए।

🚨 एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है

यह बात विशेष रूप से संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की सूचना के संदर्भ में समझनी चाहिए।

हर शिकायत सीधे FIR में परिवर्तित हो, ऐसा आवश्यक नहीं है। यदि मामला गैर-संज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) का है, तो BNSS की धारा 174 में अलग प्रक्रिया निर्धारित है।

इसलिए यह कहना कि “पुलिस हर परिस्थिति में खुद आवेदन लिखने के लिए बाध्य है” पूरी तरह सही नहीं होगा। सही कानूनी स्थिति शिकायत की प्रकृति और उसमें बताए गए अपराध पर निर्भर करती है।

👮 पुलिस अधिकारी की भूमिका क्या है?

यदि कोई व्यक्ति स्वयं लिखने में असमर्थ है और वह मौखिक रूप से संज्ञेय अपराध की सूचना देता है, तो धारा 173(1) की प्रक्रिया के अनुसार:

1. व्यक्ति अपनी बात मौखिक रूप से बता सकता है।
2. पुलिस अधिकारी उस सूचना को लिखित रूप में दर्ज करेगा/करवाएगा।
3. दर्ज की गई सूचना शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाई जाएगी।
4. शिकायतकर्ता से उसकी पुष्टि कराई जाएगी और उसके हस्ताक्षर लिए जाएंगे। 

यानी “आवेदन लिखना नहीं आता” अपने आप में संज्ञेय अपराध की सूचना देने में बाधा नहीं है।

📢 यदि पुलिस शिकायत लेने से मना करे तो?

यदि व्यक्ति संज्ञेय अपराध की सूचना देना चाहता है और थाना स्तर पर उसकी सूचना दर्ज नहीं की जाती, तो BNSS में आगे की वैधानिक प्रक्रिया भी उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष भी वैधानिक उपाय उपलब्ध हो सकते हैं।

🔍 आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण संदेश

थाने में शिकायत करने के लिए कानून की जानकारी होना जरूरी है, लेकिन कानून की जानकारी न होना आपके अधिकारों को समाप्त नहीं करता।

यदि आप स्वयं आवेदन नहीं लिख सकते हैं, तो अपनी घटना को स्पष्ट रूप से मौखिक रूप से बताइए और विशेष रूप से बताइए कि आप लिखित आवेदन तैयार करने में असमर्थ हैं।

अपने अधिकार जानिए, कानून को समझिए और सही प्रक्रिया अपनाइए।

📌 कानूनी आधार

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 — धारा 173: “Information in cognizable cases” 


Author

Agnes F. Natale

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Comments (20)

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Kecia A. Parada
June 18, 2024

There are many variations of passages the majority have suffered in some injected humour or randomised words which don't look even slightly believable.

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Thomas A. Lindsey
June 18, 2024

There are many variations of passages the majority have suffered in some injected humour or randomised words which don't look even slightly believable.

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Mary R. Lujan
June 18, 2024

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