आई एच आर सी सी फोरम के स्थापना दिवस पर चेयरमैन द्वारा सदस्यों और नागरिकों को संदेश।
आई एच आर सी सी फोरम के तीसरे स्थापना दिवस पर चेयरमैन का संदेश
प्रिय साथियों,
आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गर्व और उत्साह का दिन है।
आज आई एच आर सी सी फोरम (International Human Rights & Crime Control Forum) अपने तीसरे स्थापना दिवस की महत्वपूर्ण वर्षगांठ मना रहा है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस संघर्ष, समर्पण और सेवा की यात्रा का प्रतीक है जिसे हमने तीन वर्ष पूर्व मानवाधिकारों की रक्षा, अपराध नियंत्रण और सामाजिक न्याय की भावना से आरंभ किया था।
इन तीन वर्षों में फोरम ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचने, लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और न्याय की आवाज़ को बुलंद करने का जो प्रयास किया है, वह सराहनीय है। हमारे कार्यकर्ताओं ने न केवल अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई, बल्कि समाज में शांति, एकता और मानवता के संदेश को भी सशक्त रूप से फैलाया।
मैं फोरम के प्रत्येक सदस्य, पदाधिकारी और सहयोगी को इस अवसर पर हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ।
आपकी निष्ठा, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व ने इस संगठन को मज़बूत बनाया है।
हर वह कदम जो आपने समाज के हित में उठाया है — वह हमारे मिशन की सफलता का आधार है।
प्रिय साथियों,
आज जब हम तीसरे स्थापना दिवस पर एकत्र हुए हैं, आइए एक नया संकल्प लें —
कि हम अपने कार्य को और अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी और जन-हितकारी बनाएँगे।
हम हर उस व्यक्ति तक पहुँचेंगे जिसकी आवाज़ दबाई गई है,
और हर उस अधिकार की रक्षा करेंगे जो किसी से छीना गया है।
साथ ही, मैं आम जनता से भी अपील करता हूँ कि वे मानवाधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें।
एक जिम्मेदार समाज तभी बनता है जब हर नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाए।
तीन वर्षों की यह यात्रा केवल शुरुआत है —
आने वाले वर्षों में हम न्याय, समानता और मानवता के पथ पर और भी दृढ़ता से आगे बढ़ेंगे।
जय मानवता, जय न्याय।
— ✍️ जी के पांडेय, अधिवक्ता
चेयरमैन, आई एच आर सी सी फोरम (IHRCC FORUM)
Comments (20)
Thomas A. Lindsey
June 18, 2024There are many variations of passages the majority have suffered in some injected humour or randomised words which don't look even slightly believable.
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Mary R. Lujan
June 18, 2024There are many variations of passages the majority have suffered in some injected humour or randomised words which don't look even slightly believable.
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Kecia A. Parada
June 18, 2024There are many variations of passages the majority have suffered in some injected humour or randomised words which don't look even slightly believable.
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